ऑपरेशन सिंदूर के शहीदों को लेकर फैली भ्रांतियों पर रक्षा मंत्रालय का बड़ा बयान

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वीरगति को प्राप्त छह सैनिकों की पहचान को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए सैन्य अभियान में शहीद हुए सैनिकों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की। हालांकि रक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि सभी वीर सैनिकों को समय पर श्रद्धांजलि, सम्मान और आधिकारिक मान्यता दी जा चुकी थी।
रक्षा मंत्रालय ने बताया क्या है सच्चाई?
रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के छह शहीद सैनिकों की पहचान पहली बार राष्ट्रीय समर स्मारक पर नाम अंकित होने के बाद सामने आई है। मंत्रालय के अनुसार यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक है।
मंत्रालय ने कहा कि ऑपरेशन समाप्त होने के अगले दिन 11 मई 2025 को सेना की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में तत्कालीन डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने इन सभी वीर सैनिकों को सार्वजनिक रूप से श्रद्धांजलि दी थी।
वीरता पुरस्कारों से भी किया गया सम्मानित
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। 14 अगस्त 2025 को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में वीरता पुरस्कारों की घोषणा की गई थी। इसके अलावा भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तत्काल श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
सेना और वायुसेना ने परिजनों को सौंपे सम्मान
15 जनवरी को आयोजित आर्मी डे परेड के दौरान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने तीन शहीद सैनिकों के परिजनों को सेना मेडल (वीरता) प्रदान किया। वहीं 8 अक्टूबर 2025 को वायुसेना दिवस समारोह में वायुसेना प्रमुख ने संबंधित शहीद के परिवार को वीरता सम्मान सौंपा।

राष्ट्रीय समर स्मारक पर नाम दर्ज करने की प्रक्रिया
रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय समर स्मारक पर किसी भी शहीद का नाम अंकित करने की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है, जिसका पूरी गरिमा और सम्मान के साथ पालन किया जाता है। इसलिए यह कहना कि शहीदों को पहली बार अब सम्मान मिला है, सही नहीं है।
ऑपरेशन सिंदूर के 6 वीर सैनिक
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले छह सैनिकों के नाम इस प्रकार हैं—
- सूबेदार मेजर पवन कुमार (पंजाब रेजीमेंट)
- राइफलमैन सुनील कुमार (जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फेंट्री)
- लांस नायक दिनेश कुमार (फील्ड रेजीमेंट)
- अग्निवीर मुद मुरली नाइक (लाइट रेजीमेंट)
- हवलदार सुनील कुमार सिंह (ईएमई)
- सार्जेंट सुरेंद्र कुमार (भारतीय वायुसेना)
इसके अलावा ऑपरेशन के दौरान बीएसएफ के एक सब-इंस्पेक्टर और एक सिपाही ने भी सर्वोच्च बलिदान दिया था।
शहीदों के सम्मान पर राजनीति से बचने की अपील
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि शहीदों के सम्मान से जुड़े मामलों में तथ्यों से परे दावे न केवल भ्रम फैलाते हैं, बल्कि शोकाकुल परिवारों की भावनाओं को भी आहत कर सकते हैं। मंत्रालय ने दोहराया कि भारतीय सशस्त्र बल अपने प्रत्येक शहीद सैनिक के सम्मान और स्मृति के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं तथा उनका बलिदान सदैव राष्ट्र को प्रेरित करता रहेगा।